कांग्रेस कार्यालय बहरी मे गाँधी एवं शास्त्री जी की 154 एवं119 वीं जन्म जयंती मनाई गई

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विगत वर्षों कि भांति इस वर्ष भी युग पुरुष महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री जी की जन्म जयंती राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में कांग्रेस कार्यालय बहरी में बड़े ही हर्ष के साथ एवं सादगी पूर्वक मनाई गई |

गांंधी जी ने अहिंसा का जो पाठ लोगों को पढ़ाया उसकी विदेशों तक में आज भी चर्चा होती है | उनकी जयंती को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के तौर पर मनाया जाता है | देशभर में (2 अक्टूबर) को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री जी की 154वीं एवं 119 वीं जयंती मनाई गई |

लालबहादुर शास्त्री (जन्म: 2 अक्टूबर 1904 मुगलसराय (वाराणसी) : मृत्यु: 11 जनवरी 1966 ताशकन्द, सोवियत संघ रूस), भारत के दूसरे प्रधानमन्त्री थे। वह 9 जून 1964 से 11 जनवरी 1966 को अपनी मृत्यु तक लगभग अठारह महीने भारत के प्रधानमन्त्री रहे। इस प्रमुख पद पर उनका कार्यकाल अद्वितीय रहा। शास्त्री जी ने काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि प्राप्त की। भारत की स्वतन्त्रता के पश्चात शास्त्रीजी को उत्तर प्रदेश के संसदीय सचिव के रूप में नियुक्त किया गया था। गोविंद बल्लभ पंत के मन्त्रिमण्डल में उन्हें पुलिस एवं परिवहन मन्त्रालय सौंपा गया। परिवहन मन्त्री के कार्यकाल में उन्होंने प्रथम बार महिला संवाहकों (कण्डक्टर्स) की नियुक्ति की थी। पुलिस मंत्री होने के बाद उन्होंने भीड़ को नियन्त्रण में रखने के लिये लाठी की जगह पानी की बौछार का प्रयोग प्रारम्भ कराया। 1951 में, जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में वह अखिल भारत कांग्रेस कमेटी के महासचिव नियुक्त किये गये। उन्होंने 1952, 1957 व 1962 के चुनावों में कांग्रेस पार्टी को भारी बहुमत से जिताने के लिये बहुत परिश्रम किया।

इनसान महान पैदा नहीं होता है, उसके विचार उसे महान बनाते हैं | विचार और काम की शुद्धता और सरलता ही महान लोगों को आम लोगों से अलग करती है |
वे वही काम करते हैं, जो दूसरे करते हैं, लेकिन उनका मकसद समाज में बदलाव लाना होता है

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, जिन्हें प्यार से हम ‘बापू’ कहते हैं, महान सोच वाले एक साधारण व्यक्ति थे, वे करोड़ों देशवासियों के जीवन में बदलाव लाना चाहते थे |
आज हमें जो आजादी हासिल है, उसके लिए राष्ट्रपिता ने बड़ी कुर्बानियां दी थीं | वे सबके साथ मिलकर चलना चाहते थे | आज हम परिवार के अंदर बंट गए हैं, खुद को कंप्यूटर तक सीमित कर लिया है और स्मार्टफोन को अपनी दुनिया बना ली है.
इन जंजीरों से निकलने में बापू के विचार हमारे लिए मददगार साबित हो सकते हैं | गांधीजी जो कहते थे, वह करते थे |

प्राइड कदम हिंदी समाचार एवं प्राइड इंडिया न्यूज़ सीधी (मध्य प्रदेश)

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