प्राईड इंडिया न्यूज़ की खबर का असर: नान डिंडोरी पंचायत में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए टीम गठित

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(जिला ब्यूरो मनोज कुमार यादव)

 

सीईओ जनपद पंचायत ने दो दिन में जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के दिए निर्देश, तीन सदस्यीय टीम करेगी मामले की जांच

डिंडोरी/समनापुर। ग्राम पंचायत नान डिंडोरी में विकास कार्यों और विभिन्न मदों में हुए कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर प्राईड इंडिया न्यूज़ द्वारा प्रमुखता से खबर प्रकाशित किए जाने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। खबर का असर सामने आया है और मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जांच टीम गठित कर पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच टीम को दो दिन के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।

 

जांच के लिए गठित टीम में श्री सुंदर सिंह कंबर, बीपीओ, श्री अमर सिंह चौहान, एपीओ तथा श्री संतराम ओयाम, उप यंत्री, जनपद पंचायत समनापुर को शामिल किया गया है। वहीं ग्राम पंचायत नान डिंडोरी के सरपंच एवं सचिव को भी जांच के संबंध में सूचनार्थ किया गया है।

 

लाखों रुपये के भुगतान पर उठे सवाल

 

ग्राम पंचायत नान डिंडोरी में विकास कार्यों के नाम पर किए गए विभिन्न भुगतानों को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। आरोप है कि सरकारी दस्तावेजों में कार्यों के नाम पर राशि का भुगतान किया गया, लेकिन कई कार्यों का धरातल पर अपेक्षित लाभ ग्रामीणों को नहीं मिला।

 

मामले में एक प्रमुख शिकायत मेन रोड से बस्ती तक आंतरिक मार्ग में डस्ट मरम्मत से जुड़ी है। आरोप है कि डस्ट मरम्मत के नाम पर करीब 48 हजार रुपये का बिल भुगतान किया गया, जबकि ग्रामीणों के अनुसार मौके पर महज 5 से 6 ट्रॉली डस्ट ही डाली गई। ग्रामीणों ने पूरे भुगतान की वास्तविकता की जांच की मांग की है।

 

सफाई के नाम पर भी भुगतान का आरोप

 

इसी तरह ग्राम पंचायत में साफ-सफाई के नाम पर मजदूरी भुगतान के लिए करीब 48 हजार रुपये का बिल पास किए जाने की बात सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि कागजों में भुगतान दर्शाया गया, लेकिन मौके पर व्यापक स्तर पर सफाई कार्य दिखाई नहीं दिया।

 

15 अगस्त और आनंद उत्सव के बिलों पर भी सवाल

 

ग्राम पंचायत में 15 अगस्त एवं आनंद उत्सव के नाम पर समोसा, जलेबी, नमकीन एवं मिठाइयों सहित विभिन्न सामग्रियों के बिल लगाए जाने को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिन सामग्रियों के नाम पर भुगतान दर्शाया गया है, उनकी वास्तविक खरीद एवं वितरण की मौके पर जांच होना आवश्यक है।

 

ग्रामीणों ने कलेक्टर से की थी निष्पक्ष जांच की मांग

 

लगातार सामने आ रही कथित अनियमितताओं से नाराज ग्रामीणों ने एकजुट होकर कलेक्टर को आवेदन सौंपकर मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। साथ ही ग्रामीणों द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से पंचायत के विभिन्न कार्यों और भुगतानों से संबंधित जानकारी भी मांगी गई है।

 

अब प्रशासन द्वारा जांच टीम गठित किए जाने के बाद ग्रामीणों की नजर जांच रिपोर्ट पर है। दो दिन में जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में पंचायत के कार्यों एवं भुगतानों को लेकर लगाए गए आरोपों की वास्तविकता क्या सामने आती है।

 

प्राईड इंडिया न्यूज़ की खबर के बाद प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से ग्रामीणों में जांच को लेकर उम्मीद जगी है।

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