सीधी जिला अस्पताल में प्रसूता की मौत पर बवाल, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल; निष्पक्ष जांच की मांग तेज
"इस मौत की जिम्मेदार सिर्फ सोई हुई जनता है, जब तक समाज अन्याय और लापरवाही के खिलाफ एकजुट होकर आवाज नहीं उठाएगा, तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी।

शिवसेना प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पांडे
सीधी | 16 जुलाई 2026 | वनांचल समाचार
सीधी जिला अस्पताल में सोनाखाड़ निवासी 28 वर्षीय प्रसूता दयावती जायसवाल की उपचार के दौरान हुई मृत्यु के बाद जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर विरोध प्रदर्शन किया। परिजनों ने इलाज में लापरवाही और ऑपरेशन के नाम पर ₹20 हजार की मांग किए जाने का आरोप लगाया है। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और मामले की प्रशासनिक जांच जारी है।
घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन सक्रिय हुआ। कलेक्टर विकाश मिश्रा स्वयं जिला अस्पताल पहुंचे, घटनाक्रम की जानकारी ली और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए। घटना के बाद सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने भी जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग तेज कर दी है।
कलेक्टर विकाश मिश्रा का बयान
कलेक्टर विकाश मिश्रा ने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। संबंधित अधिकारियों को विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जांच पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ होगी तथा जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
शिवसेना प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पांडे का बयान
शिवसेना प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पांडे ने कहा,
> “इस मौत की जिम्मेदार सिर्फ सोई हुई जनता है। जब तक समाज अन्याय और लापरवाही के खिलाफ एकजुट होकर आवाज नहीं उठाएगा, तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी।”
उन्होंने कहा कि यदि परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह केवल एक परिवार की नहीं बल्कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता होगी। उन्होंने बताया कि वह स्वयं घटनास्थल पर मौजूद थे और पीड़ित परिवार की पीड़ा को करीब से देखा।
उन्होंने संबंधित महिला चिकित्सक डॉ. सुनीता तिवारी की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने, जांच पूरी होने तक उन्हें कार्यभार से अलग करने तथा दोष सिद्ध होने पर कठोर कार्रवाई की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो शिवसेना जल्द ही CMHO कार्यालय का लोकतांत्रिक घेराव और आंदोलन करेगी।
पीड़ित परिवार का पक्ष
पीड़ित परिवार का आरोप है कि गर्भवती महिला को समय पर उचित उपचार और आवश्यक चिकित्सकीय निर्णय नहीं मिला। परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन में देरी हुई और उनसे ₹20 हजार की मांग भी की गई। उनका दावा है कि यदि समय रहते उचित इलाज मिलता तो दयावती की जान बचाई जा सकती थी। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
(नोट: पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की जांच जारी है।)
क्या कहती है जिले की जनता?
> “हर घटना के बाद जांच की घोषणा होती है, लेकिन दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?”
— स्थानीय नागरिक “माताओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार जरूरी है।”
— जिले की जनता। “यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है, तो निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”
— स्थानीय जनमत
जांच पर उठ रहे सवाल
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों का कहना है कि जिला अस्पताल से जुड़े कई मामलों में पहले भी जांच के आदेश दिए गए, लेकिन कार्रवाई को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि इस मामले में भी केवल जांच तक ही कार्रवाई सीमित रही तो जनता का भरोसा और कमजोर होगा। नागरिकों ने समयबद्ध जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल स्थिति
प्रशासन द्वारा गठित जांच जारी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि चिकित्सा प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही हुई या नहीं। फिलहाल जिला प्रशासन ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है, जबकि पीड़ित परिवार, स्थानीय नागरिकों और विभिन्न संगठनों ने न्याय, जवाबदेही और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की मांग दोहराई है।