गाड़ासरई में NH-45 निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल तकनीकी मानकों की अनदेखी से बन रही नालियां, पहली बारिश में खुली पोल

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ब्यूरो-सोहन श्याम

 

गाड़ासरई,बजाग-राष्ट्रीय राजमार्ग-45 के निर्माण कार्य के तहत गाड़ासरई नगर में बनाई जा रही सीसी नालियों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों और इंजीनियरिंग गुणवत्ता की अनदेखी कर किया जा रहा है। इसका परिणाम यह है कि नालियां बनने के साथ ही कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त होने लगी हैं तथा पहली ही बारिश में उनकी कमियां उजागर हो गई हैं।

नगरवासियों के अनुसार करोड़ों रुपये की लागत से हो रहे इस निर्माण कार्य का उद्देश्य सड़क से वर्षा जल की सुचारु निकासी करना है, लेकिन वास्तविक स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है। कई स्थानों पर बारिश का पानी नालियों में समाहित होने के बजाय सड़क पर बह रहा है, जिससे सड़क पर जलभराव की स्थिति बन रही है। इससे राहगीरों, दोपहिया वाहन चालकों और स्थानीय व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नई बनी नालियों में जगह-जगह से पानी रिस रहा है। कई स्थानों पर नाली की दीवारों और जोड़ों से पानी के फुहारे निकलते देखे जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई निर्मित आरसीसी नाली में इस प्रकार का रिसाव हो रहा है तो यह निर्माण गुणवत्ता, कंक्रीट की मजबूती, जोड़ों की सीलिंग अथवा क्योरिंग (Curing) में कमी का संकेत हो सकता है।

निर्माण स्थल पर देखने से यह भी प्रतीत होता है कि कुछ स्थानों पर कंक्रीट का समुचित कम्पेक्शन नहीं किया गया है। कहीं-कहीं सरिया खुली दिखाई दे रही है, जबकि कुछ हिस्सों में ढलाई के बाद कंक्रीट उखड़ने लगी है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नाली के स्लैब भी कई स्थानों पर टेढ़े-मेढ़े बैठ गए हैं, जिससे उनकी मजबूती और टिकाऊपन पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

लोगों का कहना है कि जिस नाली का निर्माण वर्षों तक टिकने के उद्देश्य से किया जाता है, वह निर्माण के दौरान ही टूटने और दरकने लगे तो इससे कार्य की गुणवत्ता पर स्वाभाविक रूप से संदेह उत्पन्न होता है। यदि अभी यह स्थिति है तो भविष्य में भारी वर्षा के दौरान नालियों के क्षतिग्रस्त होने तथा सड़क को नुकसान पहुंचने की आशंका और अधिक बढ़ जाएगी।

नगरवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था दिखाई नहीं दे रही है। यदि नियमित रूप से तकनीकी निरीक्षण और गुणवत्ता परीक्षण किए जा रहे होते तो इतनी कम अवधि में इस प्रकार की शिकायतें सामने नहीं आतीं।

स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) तथा संबंधित निर्माण एजेंसी से पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने निर्माण में प्रयुक्त सीमेंट, सरिया, कंक्रीट की गुणवत्ता, डिजाइन, मोटाई तथा कार्यदायी एजेंसी द्वारा अपनाई गई निर्माण प्रक्रिया की जांच कराने की मांग करते हुए दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदार के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये की सार्वजनिक राशि से किए जा रहे निर्माण कार्य में प्रारंभ से ही गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं की गई तो भविष्य में इसकी मरम्मत पर फिर से सरकारी धन खर्च करना पड़ेगा, जिसका सीधा बोझ आम जनता पर ही पड़ेगा।

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