स्वच्छ भारत मिशन की जमीनी हकीकत: कसईसोढ़ा का स्वच्छता परिसर बना गंदगी का अड्डा

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डिंडोरी। आदिवासी बाहुल्य जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन जमीनी स्तर पर दम तोड़ती नजर आ रही है। लाखों रुपये की लागत से ग्राम पंचायतों में बनाए गए सामुदायिक स्वच्छता परिसर आज बदहाली और उपेक्षा का शिकार हैं। जिम्मेदार अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण कई स्थानों पर ये परिसर उपयोग के बजाय खंडहर में तब्दील होते जा रहे हैं।

 

जनपद पंचायत डिंडोरी अंतर्गत ग्राम पंचायत कसईसोढ़ा का मामला इसकी बानगी पेश करता है। यहां बने स्वच्छता परिसर के अंदर गंदगी का आलम ऐसा है कि खड़ा होना भी मुश्किल हो जाता है। परिसर में सफाई और रखरखाव की कोई व्यवस्था नजर नहीं आती। स्थानीय लोगों का आरोप है कि न तो सरपंच इस ओर गंभीर हैं और न ही सचिव ने कभी निरीक्षण या सफाई की पहल की।

 

स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब स्वच्छता परिसर के पीछे स्थित शासकीय प्राथमिक कन्या शाला भवन के आसपास भी गंदगी का अंबार लगा है। शराब की बोतलों और डिस्पोजल सामग्री के ढेर से विद्यालय परिसर की स्वच्छता और छात्राओं की सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे हैं।

 

इसी के पास स्थित पुराने पंचायत भवन में बीमार अवस्था में पड़ी एक गाय की मौत हो जाने से दुर्गंध फैल गई, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार इस समस्या की जानकारी सरपंच और सचिव को दी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

 

ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए तत्काल सफाई, रखरखाव और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सुधार नहीं हुआ तो वे विरोध प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।

 

स्वच्छता और ओडीएफ प्लस के दावों के बीच कसईसोढ़ा की यह स्थिति सरकारी दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अमला इस गंभीर लापरवाही पर क्या कदम उठाता है।

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