चांदरानी पंचायत में निर्माण कार्यों के नाम पर गबन, सरपंच-सचिव से 2.15 लाख की वसूली के आदेश

जिला ब्यूरो मनोज कुमार यादव कि रिपोर्ट
डिंडौरी। जिले की समनापुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत चांदरानी में निर्माण कार्यों के नाम पर शासकीय राशि के दुरुपयोग का गंभीर मामला सामने आया है। मामले को लेकर जिला पंचायत डिंडौरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं विहित प्राधिकारी (पंचायत) न्यायालय ने सरपंच और सचिव पर कुल 2 लाख 15 हजार रुपये की वसूली का आदेश पारित किया है। यह आदेश मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 89 के तहत जारी किया गया।
जारी आदेश के अनुसार, माननीय उच्च न्यायालय खण्डपीठ इंदौर द्वारा रिट याचिका क्रमांक 14593/2018 में पारित निर्णय के अनुपालन में शासन द्वारा धारा 89 में संशोधन किया गया था। इसके पश्चात म.प्र. राजपत्र (असाधारण) क्रमांक 606 दिनांक 30 नवंबर 2022 के माध्यम से ग्राम पंचायत मामलों में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को विहित प्राधिकारी नियुक्त किया गया।
प्रकरण में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत समनापुर द्वारा पत्र क्रमांक ज.पं.शि.शा./2025/280 दिनांक 28 अक्टूबर 2025 के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि ग्राम पंचायत भवन में गेट निर्माण तथा सीसी रोड निर्माण कार्य में शासकीय राशि का गबन किया गया है।
शिकायत की जांच जनपद स्तरीय जांच समिति द्वारा की गई। समिति ने 16 अक्टूबर 2025 को प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में पाया कि ग्राम पंचायत भवन में गेट निर्माण के नाम पर मार्च 2025 में 50,500 रुपये की राशि आहरित की गई, लेकिन निरीक्षण के दौरान मौके पर कोई गेट नहीं पाया गया। इससे राशि के गबन की पुष्टि हुई।
इसी तरह दिगम्बर के घर से शिव मंदिर तक सीसी रोड निर्माण के लिए जून और जुलाई 2025 में कुल 1,64,500 रुपये की राशि निकाली गई, जबकि जांच में मौके पर कोई निर्माण कार्य नहीं मिला। समिति ने इसे सरपंच और सचिव की मिलीभगत से शासकीय राशि के दुरुपयोग का मामला माना।
जांच में कुल 2,15,000 रुपये के गबन की पुष्टि होने पर न्यायालय ने राशि को बराबर-बराबर विभाजित करते हुए सरपंच श्रीमती मायावती परस्ते एवं सचिव श्रीमती प्रतिभा वाटिया से प्रत्येक से 1,07,500 रुपये की वसूली का आदेश दिया है।
प्रकरण में दोनों को 16 जनवरी 2026 एवं 22 जनवरी 2026 को सुनवाई के लिए अवसर प्रदान किए गए थे। दोनों ने संयुक्त रूप से लिखित जवाब प्रस्तुत किया, लेकिन अपने पक्ष में कोई ठोस दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। न्यायालय ने माना कि पर्याप्त अवसर के बावजूद प्रमाण प्रस्तुत न कर पाना आरोपों की पुष्टि करता है।
आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि यदि सात दिवस के भीतर राशि जमा नहीं की गई तो पंचायत राज अधिनियम की धारा 92 एवं मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता के तहत आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।