वित्तीय वर्ष 2025-26 के वार्षिक निरीक्षण के बाद प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश,वरिष्ठ कोषालय अधिकारी ने समस्त आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को दिए निर्देश

सीधी | 07 जनवरी 2026, सीधी जिले में वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत वरिष्ठ कोषालय कार्यालय द्वारा किए गए वार्षिक निरीक्षण के बाद समस्त आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए गए हैं। वरिष्ठ कोषालय अधिकारी ने बताया कि निरीक्षण के दौरान विशेष रूप से संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और अनियमितताओं पर गहन समीक्षा की गई।
निरीक्षण के दौरान उन मामलों पर ध्यान दिया गया, जिनमें:
क्रियेटर/वेरिफायर/अप्रूवर अथवा ई-एस-एस में दर्ज परिवार के सदस्यों के खातों में बार-बार राशि हस्तांतरण,
मृत या सेवानिवृत्त कर्मचारियों के खाते में अनधिकृत वेतन, एरियर या अन्य भुगतान,
विद्युत, पेट्रोल और अन्य मदों में स्वयं या परिजनों के खाते को वेंडर के रूप में दर्ज कर राशि आहरण,
अतिथि शिक्षकों का वेतन जो पेरोल से प्रोसेस नहीं हुआ, उन्हें ग्रांट या अन्य मद से भुगतान,
यात्रा भत्ता, चिकित्सा देयक और सेवानिवृत्ति लाभ का दोहरा भुगतान,
बिना निविदा प्रक्रिया के कर्मचारियों को लाखों रुपये का अग्रिम भुगतान,
विफल भुगतान चालानों का दुरुपयोग।
वरिष्ठ कोषालय अधिकारी ने कहा कि इसके अलावा निरीक्षण में यह भी जांच की जाएगी कि:
एक ही बैंक खाते के लिए कई वेंडर/लाभार्थी बनाकर राशि हस्तांतरण,
गृह भाड़ा भत्ता, वाशिंग अलाउंस, मुआवजा भत्ता आदि में पात्रता से अधिक भुगतान,
जेडी/डीपीओ की स्वीकृति से पूर्व वेतन निर्धारण,
बैंक खाता परिवर्तन कर राशि अन्य खातों में स्थानांतरण,
एरर राशि के नाम पर अनियमित प्रविष्टि और बार-बार राशि आहरण,
अनियमित एरर देयक भुगतान,
विक्रेताओं को बिना टीडीएस कटौती के भुगतान।
निरीक्षण कार्य को अधिकतम तीन कार्य दिवसों में पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी विशेष कारणवश समयावधि बढ़ाने की आवश्यकता होने पर आयुक्त कोष एवं लेखा की विशेष अनुमति आवश्यक होगी।
वरिष्ठ कोषालय अधिकारी ने जिले के समस्त आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को सूचित किया है कि उपरोक्त बिंदुओं के संबंध में यह सत्यापित करते हुए प्रमाण-पत्र कोषालय में प्रस्तुत करना अनिवार्य है कि सभी भुगतान नियमानुसार किए गए हैं। साथ ही भविष्य में प्रत्येक देयक के साथ प्रमाण-पत्र अनिवार्य रूप से संलग्न करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
अधिकारीयों का कहना है कि इस कदम से वित्तीय पारदर्शिता बढ़ेगी और संभावित अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित होगा।