पांढुर्णा की डबल चुनौती: सड़क पर उतरी ‘स्वच्छता सेना’, पर मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं हजारों गरीब

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संवाददाता- निलेश कलसकर जिला ब्युरो चिफ जिला पांढुरना

 

पांढुरना , 1 दिसंबर 2025।

एक ओर जहां पांढुर्णा क्षेत्र में स्वच्छता जागरूकता रैलियों का सरकारी ड्रामा चल रहा है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र के हजारों गरीब परिवार बुनियादी जीवनयापन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है—एक तरफ स्वच्छ भारत मिशन में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, और दूसरी तरफ, वर्षों से शासकीय भूमि पर बसे परिवारों को आवास और पट्टे से वंचित रखा जाना।

खंड 1: सरकारी ‘टॉयलेट’ घोटाला और दिखावे की रैली

विश्व शौचालय दिवस के उपलक्ष्य में ग्राम पंचायत भंदारगोंदी में सरकारी स्कूल के बच्चों ने स्वच्छ भारत मिशन की रैली निकालकर जागरूकता फैलाई। हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह आयोजन सिर्फ ‘खानापूर्ति’ था।

भ्रष्टाचार के बादल: जनपद पंचायत पांढुर्णा के अधिकारियों और पदाधिकारियों पर ₹12,000 की सरकारी राशि को शौचालय निर्माण के नाम पर डकारने के गंभीर आरोप लगे हैं।

जमीनी हकीकत: ग्रामीणों का कहना है कि आज भी ग्रामीण क्षेत्र की जनता खुले में शौच कर रही है, क्योंकि सरकारी फंड से बने कई शौचालय या तो अधूरे हैं या मौजूद ही नहीं हैं।

खंड 2: पट्टे के अभाव में ‘विकास की धारा’ से कोसों दूर गरीब

इसी बीच, पांढुर्णा शहर के जवाहर वार्ड, खारी वार्ड, जूना पांढुर्णा नगर, और ग्राम पंचायत गुजरखेड़ी नीमढाना के गरीब और जरूरतमंद परिवारों ने सोमवार को कलेक्टर के नाम तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंपा।

मांग: शासकीय भूमि पर वर्षों से रह रहे दलित, आदिवासी, पिछड़ा और सामान्य वर्ग के परिवारों को तत्काल भूमि का पट्टा प्रदान किया जाए।

वंचितता: आदिवासी नेता दुर्गेश उईके ने बताया कि पट्टा न होने के कारण ये परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी केंद्रीय योजनाओं से वंचित हैं।

दैनिक संघर्ष: झुग्गी-झोपड़ी में निवास करने वाले इन परिवारों को बिजली, पानी, सड़क और नाली जैसी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव झेलना पड़ रहा है, जिससे उनका जीवन स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है।

निष्कर्ष

पांढुर्णा की इन दोनों घटनाओं से स्पष्ट है कि क्षेत्र में सरकारी योजनाओं का लाभ सही लाभार्थियों तक पहुंचाने में बड़ी चूक हो रही है। जहां एक ओर स्वच्छता मिशन फंड के दुरुपयोग के कारण विफल हो रहा है, वहीं दूसरी ओर आवास और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे गरीब परिवारों को न्याय की दरकार है। प्रशासन को जल्द ही इन दोनों प्रमुख समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

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