“एसआईआर प्रक्रिया संदिग्ध: राजनीतिक लोगों की बीएलओ सहायक नियुक्ति तुरंत रद्द की जाए – अजय सिंह”

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भोपाल, 26 नवम्बर 2025।

पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने प्रदेश में चल रही एसआईआर (स्पेशल समरी रिवीजन) प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बीएलओ सहायकों के रूप में जन अभियान परिषद सहित बाहरी संगठनों और राजनीतिक पृष्ठभूमि के लोगों की नियुक्तियां करके निर्वाचन प्रक्रिया को संदेह के घेरे में डाल दिया गया है। सिंह ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि ऐसी सभी विवादित नियुक्तियों को तत्काल निरस्त किया जाए और राजनीतिक रूप से सक्रिय व्यक्तियों को एसआईआर कार्य से पूरी तरह बाहर रखा जाए।

 

उन्होंने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से आग्रह किया कि जिला निर्वाचन अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर बाहरी व्यक्तियों को तुरंत एसआईआर प्रक्रिया से हटाया जाए।

 

अजय सिंह ने दावा किया कि राहुल गांधी द्वारा मतदाता सूची में गड़बड़ी के जो प्रमाण प्रस्तुत किए गए हैं, उसी तरह की शुरुआत अब मध्यप्रदेश में भी दिखने लगी है। दतिया जिले में बीएलओ की मदद के नाम पर भाजपा कार्यकर्ताओं को चार पोलिंग बूथों पर तैनात किया गया। जिला कांग्रेस की शिकायत के बाद कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने यह पूरी सूची निरस्त कर दी और सूची देने वाले जन अभियान परिषद के जिला एवं ब्लॉक समन्वयकों को नोटिस जारी किया।

 

सिंह ने कहा कि 2018 के चुनावों में भी जन अभियान परिषद के पदाधिकारियों ने सत्ताधारी दल के पक्ष में खुले तौर पर कार्य किया था। उस समय भी चुनाव आयोग ने इस पर कार्रवाई की थी और परिषद की गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिए थे। कई पदाधिकारियों पर एफआईआर भी दर्ज हुई थी।

 

उन्होंने कहा कि अब एक बार फिर वही स्थिति पैदा की जा रही है, जिससे चुनावी निष्पक्षता प्रभावित हो रही है। वर्तमान में प्रदेश के 313 ब्लॉकों, 51 जिलों और 10 संभागों में परिषद के संविदा समन्वयक और उनसे जुड़ा बड़ा नेटवर्क सक्रिय है, जो मतदाताओं को प्रभावित करने और बूथ प्रबंधन का काम करता है।

 

अजय सिंह ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से समय रहते जन अभियान परिषद की गतिविधियों पर रोक लगाने और एसआईआर प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने की मांग की है।

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