मारपीट करने वाले आरोपीगण को 03-03 माह का सश्रम कारावास व अर्थदण्ड से दण्डित किया गया
माननीय न्यायालय श्रीमती ऋचा बठेजा, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, जबलपुर के द्वारा पारित निर्णय के अंतर्गत थाना गोहलपुर के अप0 क्रं. 664/2016 व सत्र प्रकरण क्रमांक 5910/2016 के प्रकरण में आरोपीगण शमीम शाह एवं सरफुल्लाह कोे धारा 452 भादवि के अपराध में 03-03 माह का सश्रम कारावास एवं 1000-1000 रू अर्थदण्ड, धारा 323 भादवि में न्यायालय उठने तक का कारावास व 1000-1000 रू अर्थदण्ड व 427 भादवि में न्यायालय उठने तक का कारावास व 2000-2000 रू अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।
घटना संक्षेप में इस प्रकार है कि फरियादी ने थाना गोहलपुर में उपस्थित होकर रिपोर्ट लेख कराई कि उसका स्वयं का व्यवसाय रद्दी की दुकान पंचशील स्कूल के पास, पसियाना में है। दिनांक 06.10.2016 को दोपहर 02ः15 बजे वह नमाज पढ़ने चोपड़ा मस्जिद मोटरसाईकिल से गया था, नमाज पढ़कर वापस अपनी दुकान में आया, उसी समय उसकी दुकान में साबिर, शमीम तथा दो भान्जे अचानक दुकान में घुस कर उसे माँ बहन की बुरी-बुरी गालियों दिये। सभी ने हाथ घूसों से मारपीट की जो उसके मुँह व पीठ में लगी। शमीम रॉड लिये था। उसकी लेबर को कह रहे थे कि पहले वे माल उतारेंगे, बाद में लंच होगा, उसने कहा कि नमाज पढ़ने के बाद काम होगा, इसी बात को लेकर मारपीट कर जान से मारने की धमकी दिये व कुर्सी व दरवाजे तोड़ दिये। उक्त के आधार पर आरक्षी केन्द्र गोहलपुर के अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। संपूर्ण विवेचना उपरांत अभियोग-पत्र माननीय न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
उप-संचालक(अभियोजन) श्री विजय कुमार उईके व सहायक निदेशक/प्रभारी जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्रीमती स्मृतिलता बरकडे़ के मार्गदर्शन में श्रीमती अंजीता सिंह सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी द्वारा उक्त मामले में पैरवी की गई ।
श्रीमती अंजीता सिंह सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी के तर्को से सहमत होते हुए माननीय न्यायालय श्रीमती ऋचा बठेजा, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, जबलपुर के द्वारा पारित निर्णय के अंतर्गत थाना गोहलपुर के अप0 क्रं. 664/2016 व प्रकरण क्रमांक 5910/2016 के प्रकरण में आरोपीगण शमीम शाह एवं सरफुल्लाह कोे धारा 452 भादवि के अपराध में 03-03 माह का सश्रम कारावास एवं 1000-1000 रू अर्थदण्ड, धारा 323 भादवि में न्यायालय उठने तक का कारावास व 1000-1000 रू अर्थदण्ड व 427 भादवि में न्यायालय उठने तक का कारावास व 2000-2000 रू अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।