ग्राम पंचायत बगदरा कला में भ्रष्टाचार और लापरवाही की पोल खुली – सचिव पर गंभीर आरोप

ब्यूरो रिपोर्ट: रोहित कुमार शाह

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सिंगरौली, चितरंगी:


जिले की ग्राम पंचायत बगदरा कला एक बार फिर प्रशासनिक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में है। पंचायत सचिव शिव बहादुर सिंह पर भ्रष्टाचार, लापरवाही, पद के दुरुपयोग और आदिवासी सरपंच के साथ भेदभाव जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं।

सचिव की गैरहाजिरी बनी ग्रामीणों की परेशानी

पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव नियमित रूप से कार्यालय में उपस्थित नहीं रहते। जनसुनवाई जैसे महत्वपूर्ण दिनों में दफ्तर बंद मिलना आम बात बन गई है। कार्यों के प्रति न ही जवाबदेही है और न ही पारदर्शिता।

खुलेआम “कमीशन” की मांग!

स्थानीयों के अनुसार सचिव पर 15वें वित्त आयोग की योजनाओं में 10% कमीशन मांगने के आरोप हैं। इतना ही नहीं, मजदूरी भुगतान (मस्टर रोल) में भी 5% रिश्वत की बात सामने आई है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि सचिव खुलेआम कहते हैं—
“मैं जहां भी रहा, इतना तो लेता ही हूं… मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते।”

आदिवासी सरपंच के साथ भेदभाव और शोषण

बगदरा कला की आदिवासी महिला सरपंच ने सचिव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें योजनाओं और कार्यों से अंधेरे में रखा जाता है। उनके सम्मान और संवैधानिक अधिकारों का हनन हो रहा है। सचिव उन्हें “नकली सरपंच” कहकर अपमानित करते हैं।

आवास योजना में भी घोटाले की बू

प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) में भी गड़बड़ियों के आरोप लगे हैं। पात्र लोगों का रजिस्ट्रेशन रोकने के एवज में पैसे मांगे गए। बाद में मरहेगा तरंगी पंचायत के सचिव से दोबारा सर्वे करवाकर काम पूरा कराया गया।

ग्रामीणों की मांग – जांच हो, न्याय हो

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि:

सचिव शिव बहादुर सिंह के खिलाफ तत्काल जांच हो

ईमानदार सचिव की नियुक्ति की जाए

आदिवासी सरपंच एवं पंचायत प्रतिनिधियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हो

अब सवाल यह है…

क्या जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेगा?
क्या आदिवासी नेतृत्व को उसका सम्मान और अधिकार मिल पाएगा?
या फिर भ्रष्टाचार की यह चुप्पी यूँ ही चलती रहेगी…?

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