कचड़ा और पौधा रोपण को लेकर सिर्फ चर्चा ही चर्चा ।
बेतिया । राजनैतिक गोल बंदी के बीच नगर निगम बेतिया । जी हां हम बात कर रहे हैं बेतिया नगर निगम की जहां वोट के समय में वोट को लेकर चर्चा पुरे बिहार में थी, बिहार का सबसे पहला नगर निगम है जहां पर जनता ने अपने प्रतिनिधि को सर्वाधिक वोटों से उन्हें नगर निगम का सिरमौर बनाया और बिहार में एक ऐतिहासिक जीत दर्ज हुआ । लेकिन नगर के दिनेश राय, पूजा कुमारी, बुधराम महतो, वकील मियां, धर्मेश कुमार, अनिल तिवारी, राखी श्रीवास्तव, अर्चना तिवारी, मोहन भगत, बलि सिंह, हाफिज अंसारी आदि दर्जनों लोगों का कहना है कि नगर निगम सिर्फ दिखावे के लिए है क्योंकि बस स्टेशन से लेकर चेक पोस्ट के बीच इतनी कचड़ा है कि उधर से गुजरने का आत्मा नहीं करता है , लेकिन मजबूरी है उधर से जाना क्योंकि रास्ता ही वही है पर सिर्फ कचरे की ही बात नहीं है। सूत्रों की माने तो महापौर सैकड़ो पौधे लगाती हैं फोटो अखबारों और चैनलो में छा जाती है लेकिन सवाल यह है कि उन पौधों का सरक्षण कौन करेगा ? उसकी रक्षा कौन करेगा ? क्या सिर्फ पौधा लगाने से और बाहवही करा लेने से नगर निगम का विकास हो जाएगा ? वही नगर निगम में चल रहे राजनैतिक गोल बंदी को लेकर लोगों का कहना है कि अब बेतिया नगर निगम का विकास होना असंभव है , क्योंकि विकास के जगह वार्ड पार्षद और महापौर और कर्मियों अधिकारियों सभी लोगों के बीच ना जाने क्या बात है कि हमेशा आरोप प्रत्यारोप चलते रहता है । अगर सड़क की बात करे तो नगर निगम के सड़कों का हाल बहुत बेहाल हो चुका है जिसपे किसी की नजर नहीं है चाहे वह वॉर्ड पार्षद हो, महापौर हो, विधायक हो या सांसद हो । साथी अगर छठ महापर्व को लेकर बात करें तो तलाब और पोखरा कि सफाई के नाम पर ना जाने कितने राशि पानी की तरह बहा दिया गया है । लेकिन पानी से वैसे ही दुर्गंध आ रही है जैसे सफाई के पहले आती थी । वही एक ओर नगर में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है लेकिन देखा जाए तो मच्छर भगाने वाली फंगी मशीन का दो-तीन माह पर एक बार नजर आता है और उसमें भी दवा के नाम पर सिर्फ डीजल का छिड़काव हो रहा है जो अपने आप में चर्चा का विषय बना हुआ है । वर्तमान स्थिति से ऐसा प्रतीत होता है कि नगर निगम का विकास भगवान भरोसे है ।