ऐतिहासिक क्रांति दिवस 9 अगस्त की 82 वीं वर्षगांठ पर फहराएं अपने घर खादी का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा

करो या मरो के संकल्प के साथ 8 अगस्त 1942 की रात्रि को महात्मा गांधी ने किया था अंग्रेजों भारत छोड़ो का आह्वान
प्राइड इंडिया न्यूज़ रीवा से
संवाददाता शिबेन्द सिंह की रिपोर्ट
रीवा 8 अगस्त । समता संपर्क अभियान , नारी चेतना मंच , समाजवादी कार्यकर्ता समूह एवं विंध्यांचल जन आंदोलन के संयुक्त तत्वावधान में आगामी 9 अगस्त से लेकर स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त तक स्वतंत्रता सप्ताह के रूप में हर घर खादी का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फ़हराने की जन जन के अपील की गई है। समता संपर्क अभियान के राष्ट्रीय संयोजक लोकतंत्र सेनानी अजय खरे ने यहां बताया कि भारत की आजादी का राष्ट्रव्यापी अंतिम निर्णायक आंदोलन की शुरुआत मुंबई में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के द्वारा करो या मरो के संकल्प के साथ अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन के आह्वान पर 9 अगस्त 1942 को मुंबई के गोवालीया मैदान में युवा सत्याग्रही अरुणा आसफ अली ने तिरंगा ध्वजारोहण कर के आंदोलन को गति प्रदान की थी । 8 अगस्त 1942 की रात्रि को महात्मा गांधी के साथ प्रथम पंक्ति के बड़े नेताओं की गिरफ्तार कर लिया गया था और इसके बाद आजादी के आंदोलन की जिम्मेदारी युवा क्रांतिकारी वर्ग पर आ गई थी । देश की स्वतंत्रता की लड़ाई नागरिक आजादी , समता ,समृद्धि , स्वाबलंबन , न्याय , स्वदेशी आदि मूल्यों के साथ लड़ी गई थी। यह भारी विडंबना है कि आजादी के 77 सालों में भी लोगों को गैर बराबरी नाइंसाफी और बुनियादी जरूरतों के संकट का सामना करना पड़ रहा है । लोकतंत्र सेनानी श्री खरे ने कहा कि गति 2 वर्ष पहले मनाए गए देश की आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष को सरकारी खानापूर्ति बना दिया गया। आजादी के आंदोलन के मूल्यों एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के त्याग बलिदान से देश के जन-जन को वाकिफ होना जरूरी है। देखने को मिलता है कि स्थानीय स्थल पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को कोई याद नहीं करता। उनके वंशजों के बारे में प्रशासन के पास कोई लेखा जोखा नहीं है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बारे में जिला कलेक्टर के यहां से जानकारी मांगने पर आनाकानी की जाती है। स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के साथ प्रशासन का रवैया बेहद आपत्तिजनक है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के जन्मदिन और पुण्यतिथि पर उन्हें कभी याद नहीं किया जाता। उनकी स्मृति में कभी दो फूल भी नहीं चढ़ाए जाते। 30 जनवरी को शहीद दिवस की स्मृति में भी 2 मिनट का मौन रखना भी मुश्किल होता है। घर-घर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराने का उद्देश्य देश की आजादी के आंदोलन से निकले मूल्यों और संविधान की रक्षा करने का संकल्प है। स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों को नजरअंदाज किए जाने से देश में आज भी गैर बराबरी , विषमता , भ्रष्टाचार , महंगाई , धार्मिक सामाजिक नफरत का बोलबाला है । आज यदि इन सब बातों को लेकर कहीं कोई सुनवाई नहीं तो आजादी की लड़ाई व्यर्थ हो जाएगी। श्री खरे ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी खादी को महज़ वस्त्र नहीं एक विचार कहते थे जिसके चलते आजादी के आंदोलन के दौरान देश को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास शुरू हो गए थे। अंग्रेजों को खादी पहनने वाला हर व्यक्ति बागी नजर आता था। देश की आजादी के आंदोलन में खादी की अहम भूमिका रही है। आजाद भारत में खादी की अनदेखी अत्यंत आपत्तिजनक दुर्भाग्यपूर्ण बात है।
ताम्रपत्रधारी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय श्री ओंकार नाथ खरे के ज्येष्ठ पुत्र लोकतंत्र सेनानी अजय खरे ने कहा कि 9 अगस्त की सुबह 8:00 बजे लोग अपने-अपने घरों में राष्ट्रीय झंडारोहण करें । शाम को 3 बजे स्थानीय पूनम जनवासा नेहरू नगर रीवा में राष्ट्रीय आंदोलन की 82 वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक विचार संगोष्ठी रखी गई है जिसमें देश के आजादी के आंदोलन के संदर्भ में अमर शहीदों एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की पावन स्मृतियों को याद करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके साथ ही स्वतंत्रता सप्ताह पर आजादी के आंदोलन से संबंधित विभिन्न कार्यक्रम रखते हुए 15 अगस्त को 78 वां स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा।