मड़वास थाने का मामला: रोशनी गुप्ता का बड़ा दावा—“मैं खुद गैस सिलेंडर से जली हूं, दबाव में दिलवाया गया बयान”

ग्राम महखोर निवासी महिला ने अपने परिवार को मामले में फंसाए जाने पर जताई आपत्ति, बेटे दीपू गुप्ता को बताया घटना का प्रत्यक्ष गवाह; रीवा में इलाज और साक्ष्य होने का किया दावा, निष्पक्ष जांच की मांग
प्राइड कदम समाचार | जिला सीधी।
सीधी जिले के मड़वास थाना क्षेत्र में 8 अक्टूबर को हुई घटना को लेकर ग्राम महखोर निवासी रोशनी गुप्ता, पति रामजी गुप्ता का बयान सामने आया है। महिला ने दावा किया है कि वह स्वयं गैस सिलेंडर से जलकर घायल हुई थीं, लेकिन घटना को लेकर दिए गए बयान के संबंध में उन्होंने दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि पूरे मामले की वास्तविकता सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति या परिवार के साथ अन्याय न हो।
महिला की ओर से सामने आए वीडियो बयान के बाद घटना की परिस्थितियों, घायल होने के कारण और संबंधित लोगों की भूमिका को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस की जांच, चिकित्सकीय दस्तावेजों और संबंधित गवाहों के बयानों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।
महिला का दावा—गैस सिलेंडर से जलकर हुई घायल
रोशनी गुप्ता ने अपनी बात रखते हुए दावा किया कि वह स्वयं गैस सिलेंडर से जलकर घायल हुई थीं। उनका कहना है कि घटना के संबंध में उनकी बात को सही तरीके से समझा जाना चाहिए और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए।
महिला ने यह भी आरोप लगाया कि कई लोगों के दबाव में उनसे बयान दिलवाया गया। उनके अनुसार, घटना की वास्तविक परिस्थितियों और उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए। हालांकि, कथित दबाव के संबंध में अभी स्वतंत्र रूप से कोई पुष्टि सामने नहीं आई है।
महिला की मांग है कि मामले में किसी भी व्यक्ति के बयान को अंतिम सत्य मानने के बजाय सभी संबंधित पक्षों की बात सुनी जाए। साथ ही, घटनास्थल से जुड़े तथ्यों, चिकित्सकीय रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जाए, जिससे घटना की वास्तविक परिस्थितियां सामने आ सकें।
बेटे दीपू गुप्ता को बताया प्रत्यक्ष गवाह
महिला रोशनी गुप्ता ने अपने बेटे दीपू गुप्ता का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उसने घटना को अपनी आंखों से देखा था। परिवार का कहना है कि घटना के संबंध में बेटे सहित अन्य संबंधित लोगों से भी जानकारी ली जानी चाहिए।
यदि दीपू गुप्ता घटना के प्रत्यक्षदर्शी हैं, तो उनका बयान जांच के दौरान महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, उनके बयान और घटना के संबंध में उनकी जानकारी की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसी द्वारा की जानी आवश्यक है।
परिवार का कहना है कि मामले में सभी संभावित गवाहों के बयान दर्ज किए जाएं और किसी भी पक्ष की बात को नजरअंदाज न किया जाए। परिजनों के मुताबिक, निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और उस समय वास्तव में क्या हुआ था।
रीवा में इलाज होने की बात, चिकित्सकीय रिकॉर्ड की जांच की मांग
परिवार की ओर से बताया गया है कि रोशनी गुप्ता का रीवा में इलाज चल रहा था। परिजनों ने दावा किया कि उनके पास घटना से संबंधित साक्ष्य मौजूद हैं और जरूरत पड़ने पर संबंधित अस्पताल तथा चिकित्सकों से जानकारी लेकर तथ्यों की पुष्टि की जा सकती है।
परिवार का कहना है कि महिला के इलाज से जुड़े चिकित्सकीय दस्तावेजों, अस्पताल के रिकॉर्ड और घटना से संबंधित अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जानी चाहिए। इन दस्तावेजों से महिला की चोटों तथा इलाज के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। हालांकि, चिकित्सकीय रिकॉर्ड की वास्तविक सामग्री और उससे निकलने वाले निष्कर्षों की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।
परिजनों ने यह भी कहा कि यदि जांच के दौरान आवश्यक समझा जाए, तो संबंधित चिकित्सकों से जानकारी लेकर घटनाक्रम की पुष्टि की जा सकती है। परिवार की मांग है कि उपलब्ध दस्तावेजों और गवाहों के बयानों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ाई जाए।
“हमारे घर-परिवार को न फंसाया जाए”
रोशनी गुप्ता और उनके परिवार की ओर से मामले में अपने घर-परिवार को फंसाए जाने पर आपत्ति जताई गई है। महिला का कहना है कि घटना की वास्तविकता सामने आनी चाहिए और किसी भी निर्दोष व्यक्ति को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
परिवार ने आरोप लगाया कि मामले को लेकर जो बातें सामने आ रही हैं, उनकी सच्चाई की जांच की जानी चाहिए। परिजनों का कहना है कि उनके पास अपनी बात रखने के लिए तथ्य और साक्ष्य हैं, इसलिए सभी संबंधित पक्षों को सुनकर निष्पक्ष निर्णय लिया जाना चाहिए।
परिवार की इस मांग के बीच यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी व्यक्ति को दोषी या निर्दोष ठहराने का निर्णय केवल आरोपों के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए संबंधित साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और जांच के निष्कर्षों का परीक्षण आवश्यक है।
8 अक्टूबर की घटना को लेकर उठे सवाल
मड़वास थाना क्षेत्र में 8 अक्टूबर को हुई घटना के संबंध में महिला के बयान के बाद कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आए हैं। इनमें घटना के समय की वास्तविक परिस्थितियां, महिला के घायल होने का कारण, कथित दबाव में बयान दिलवाए जाने का आरोप और घटना के प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी शामिल है।
इन सभी बिंदुओं की पुष्टि के लिए घटनाक्रम से जुड़े लोगों के बयान, चिकित्सकीय दस्तावेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यदि परिवार द्वारा साक्ष्य प्रस्तुत किए जाते हैं, तो उनकी जांच के आधार पर मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, अभी यह कहना उचित नहीं होगा कि महिला के आरोप सही हैं या मामले में किसी व्यक्ति को जानबूझकर फंसाया गया है। इन पहलुओं पर स्थिति जांच पूरी होने और संबंधित तथ्यों की पुष्टि के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
निष्पक्ष जांच की मांग, पुलिस के आधिकारिक पक्ष का इंतजार
रोशनी गुप्ता और उनके परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। परिवार चाहता है कि सभी संबंधित पक्षों की बात सुनी जाए, गवाहों के बयान लिए जाएं और उपलब्ध चिकित्सकीय रिकॉर्ड सहित अन्य साक्ष्यों की जांच की जाए।
मामले में मड़वास थाना प्रभारी भूपेश बैस का नाम परिवार द्वारा दिए गए विवरण में सामने आया है। हालांकि, इस प्रकरण में पुलिस की कार्रवाई, जांच की वर्तमान स्थिति और लगाए गए आरोपों पर पुलिस का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं है।
अब महत्वपूर्ण यह है कि महिला के बयान, बेटे दीपू गुप्ता की गवाही, चिकित्सकीय दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद वास्तविक घटनाक्रम सामने आए। निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि 8 अक्टूबर को हुई घटना की परिस्थितियां क्या थीं और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।