प्रदेश संगठन मंत्री किसान कांग्रेस विकाश सिंह चौहान ने नेता प्रतिपक्ष जीतू पटवारी को सौंपा था आवेदन, प्रमुख सचिव को लिखा गया पत्र,सीधी जिला अस्पताल की आउटसोर्स भर्ती पर पहले ही उठाए थे सवाल

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सीधी। जिला अस्पताल सीधी में आउटसोर्स भर्ती प्रक्रिया को लेकर सामने आ रहे गंभीर आरोपों के बीच अब यह मामला और महत्वपूर्ण हो गया है। भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की आशंका को लेकर कमर्जी हाउस सीधी निवासी एवं प्रदेश संगठन मंत्री, किसान कांग्रेस विकाश सिंह चौहान द्वारा पूर्व में ही मामले की जांच की मांग उठाई गई थी।

 

विकाश सिंह चौहान ने इस संबंध में मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष जीतू पटवारी से मुलाकात कर जिला अस्पताल की आउटसोर्स भर्ती प्रक्रिया की जांच कराने का आग्रह किया था। उनके आवेदन के आधार पर नेता प्रतिपक्ष कार्यालय की ओर से प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, मध्यप्रदेश शासन को पत्र भेजकर मामले का परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया गया।

 

कलेक्टर द्वारा नियुक्तियां निरस्त किए जाने का भी पत्र में उल्लेख

 

25 अगस्त 2025 को नेता प्रतिपक्ष कार्यालय से जारी पत्र में सीधी जिले के स्वास्थ्य विभाग में बड़े पैमाने पर हुई आउटसोर्स भर्ती का उल्लेख किया गया है। पत्र में कहा गया है कि जिला कलेक्टर द्वारा की गई नियुक्तियों में भ्रष्टाचार पाए जाने पर नियुक्तियां निरस्त की गई थीं, लेकिन पत्र के अनुसार संबंधित दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं होने की बात सामने आई है।

 

पत्र में शासन स्तर पर मामले का परीक्षण कर वांछित कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया गया है।

 

अब 20 युवाओं से कथित वसूली के आरोप

 

इसी बीच सीधी जिला अस्पताल की आउटसोर्स भर्ती को लेकर करीब 20 युवाओं से ₹1 से ₹2 लाख तक वसूली किए जाने के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि युवाओं को सरकारी नौकरी का झांसा देकर यह भरोसा दिलाया गया कि कुछ वर्षों बाद उनकी आउटसोर्स नौकरी सरकारी पद में बदल सकती है।

 

वहीं भर्ती प्रक्रिया में तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. खरे सहित अन्य संबंधित लोगों की भूमिका और कथित पैसों के लेन-देन को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

 

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

 

120 पदों की भर्ती में करीब 20 पद रिक्त होने का दावा

 

बताया जा रहा है कि पूर्व में स्वीकृत 120 पदों वाली आउटसोर्स भर्ती में करीब 20 पद रिक्त रह गए थे। आरोप है कि बाद में इन रिक्त पदों पर बिना टेंडर और बिना सार्वजनिक विज्ञप्ति के भर्ती की गई।

 

मामले में करीब ₹20 से ₹30 लाख तक की कथित वसूली की जानकारी भी सामने आने का दावा किया जा रहा है। कुछ पुराने कर्मचारियों की भर्ती और कुछ नई नियुक्तियों को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

 

विकाश सिंह चौहान की मांग—दोषियों पर FIR हो

 

विकाश सिंह चौहान का कहना है कि बेरोजगार युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उनका आग्रह है कि नेता प्रतिपक्ष द्वारा शासन के प्रमुख सचिव को भेजे गए पत्र पर तत्काल कार्रवाई की जाए और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

 

यदि जांच में भ्रष्टाचार, अवैध लेन-देन अथवा नियम विरुद्ध भर्ती के आरोप प्रमाणित होते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं अन्य दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।

 

सवाल यह—पत्र के बाद कार्रवाई कब?

 

जिला अस्पताल की आउटसोर्स भर्ती को लेकर पहले ही शिकायत और शासन स्तर पर कार्रवाई की मांग किए जाने के बावजूद अब नए आरोप सामने आने से मामला फिर चर्चा में है।

 

अब सवाल यह है कि नेता प्रतिपक्ष के पत्र पर शासन स्तर से क्या कार्रवाई हुई?

क्या भर्ती प्रक्रिया और कथित आर्थिक लेन-देन की निष्पक्ष जांच होगी?

क्या जिम्मेदार लोगों की भूमिका तय की जाएगी?

और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो FIR और कानूनी कार्रवाई कब होगी?

 

बेरोजगार युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मामले में अब निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग जोर पकड़ रही है।

 

विकाश सिंह चौहान

प्रदेश संगठन मंत्री, किसान कांग्रेस

कमर्जी हाउस, सीधी

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