भावांतर योजना: किसानों के लिए छलावा?

संवाददाता – निलेश कलसकर जिला ब्युरो जिला पांढुरना
पांढुरना – सरकार द्वारा शुरू की गई भावांतर योजना का उद्देश्य किसानों को उनकी फसलों के लिए उचित मूल्य दिलाना है, लेकिन वास्तव में इसका लाभ हर किसान को नहीं मिल पा रहा है। इस योजना का सबसे बड़ा फायदा व्यापारियों को हो रहा है, जबकि छोटे और सीमांत किसान इससे वंचित रह जाते हैं।
छोटे किसानों की समस्या:
छोटे किसान अपनी फसलें मंडियों में बेचने के बजाय सीधे व्यापारियों को बेचना पसंद करते हैं। इसका कारण यह है कि मंडियों में फसल बेचने के लिए उन्हें कई तरह की औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं और समय भी लगता है। इसके अलावा, मंडियों में फसल का मूल्य भी कम मिलता है।
भावांतर योजना का लाभ:
भावांतर योजना के तहत, सरकार व्यापारियों को सब्सिडी देती है ताकि वे किसानों से फसलें खरीद सकें। लेकिन इस योजना का लाभ केवल बड़े किसान और व्यापारी उठा पाते हैं। छोटे किसान अपनी फसलें सीधे व्यापारियों को बेच देते हैं और उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल पाता।
सरकार को क्या करना चाहिए?:
सरकार को चाहिए कि वह किसानों की फसलों का अनुमानित मूल्य तय करे और फसल निकलने से पहले ही उनके खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर कर दे। इससे छोटे किसानों को भी फायदा होगा और वे अपनी फसलें कहीं भी बेच सकेंगे।
निष्कर्ष:
भावांतर योजना का उद्देश्य किसानों को लाभ पहुंचाना है, लेकिन इसका फायदा केवल बड़े किसानों और व्यापारियों को हो रहा है। सरकार को चाहिए कि वह इस योजना में बदलाव करे और छोटे किसानों को भी इसका लाभ दिलाए।