विकाश नारायण तिवारी ने कहा कि जिला अस्पताल भ्रष्टाचार प्रकरण—क्या मामला ठंडे बस्ते में?

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विकाश नारायण तिवारी ने कहा कि
जिला अस्पताल भ्रष्टाचार प्रकरण—क्या मामला ठंडे बस्ते में?
लोग पूछ रहे हैं: डॉक्टरों द्वारा कथित उगाही/गलत भर्ती की जांच कहाँ पहुँची? क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या फाइलें थम गईं?

हमारी साफ मांगें

1. टाइमलाइन घोषित हो — किस एजेंसी से जांच, कब तक रिपोर्ट?

2. जिम्मेदार तय हों — दोषी पाए जाने पर निलंबन, रिकवरी व एफआईआर।

3. पारदर्शिता — प्रगति रिपोर्ट हर सप्ताह सार्वजनिक (वेबसाइट/नोटिस बोर्ड)।

4. पीड़ितों की सुनवाई — हेल्पलाइन/व्हिसलब्लोअर डेस्क, गुमनाम शिकायत की सुविधा।

अस्पताल सुधार के त्वरित कदम

भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन: मेरिट-आधारित, लाइव लिस्ट/कट-ऑफ सार्वजनिक।

ऑडिट: दवा खरीद, बिलिंग व आउटसोर्स कॉन्ट्रैक्ट का थर्ड-पार्टी ऑडिट।

मरीज सुविधा: OPD टोकन, दवा उपलब्धता बोर्ड, दर-सूची/अधिकार-चार्टर प्रदर्शित।

सीसीटीवी व ट्रैकिंग: संवेदनशील वार्ड/काउंटर पर निगरानी, शिकायत पर 72 घंटे में निवारण।

जन भागीदारी: मासिक सार्वजनिक सुनवाई, जिला स्तरीय अस्पताल निगरानी समिति।

जिला प्रशासन से निवेदन

30 दिनों का सुधार रोडमैप जारी करें।

जांच की स्टेटस रिपोर्ट तुरंत साझा करें—किस चरण में, अगला कदम क्या।

📢 निष्कर्ष: यह मामला ठंडे बस्ते में न जाए—जांच, जवाबदेही और सुधार—तीनों साथ चाहिए।

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