सरकार बिजली नहीं दे सकती तो मिट्टी का तेल ही दे दे – ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

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सीधी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार हो रही विद्युत कटौती से लोगों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। हालात यह हो चुके हैं कि ग्रामीणों को अब सरकार से बिजली नहीं, बल्कि मिट्टी का तेल मांगना पड़ रहा है, ताकि रात के अंधेरे में कुछ तो सहारा मिल सके।

ग्रामवासियों ने बताया कि बीते कई माह से दिन के साथ रात भर बिजली पूरी तरह गुल रहती है। न तो पंखे चल पाते हैं और न ही बोरिंग से पानी मिल पाता है। छोटे बच्चों को गर्मी और मच्छरों से जूझना पड़ रहा है, वहीं सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीवों का डर अलग सताता है। अंधेरे में दैनिक जीवन जैसे ठहर गया हो।

सरकार भले ही 24 घंटे बिजली देने का दावा करती हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। जब ग्रामीण स्थानीय बिजली विभाग के अधिकारियों या कर्मचारियों को फोन करते हैं तो या तो फोन बंद मिलता है या फिर कोई जवाब नहीं दिया जाता। कभी तार टूटने, कभी पोल गिरने, तो कभी फॉल्ट का बहाना बनाकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया जाता है।

बिजली विभाग मेंटेनेंस के नाम पर अकसर बिजली काट देता है, लेकिन ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर यह कैसी मेंटेनेंस है जिसमें रोज तार और पोल टूटते हैं? उन्हें अब यह सब केवल बहानेबाज़ी लगती है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जब तक बिजली की स्थायी व्यवस्था नहीं हो पाती, तब तक कम से कम मिट्टी का तेल कोटा के माध्यम से सभी गांव में उपलब्ध कराया जाए, जिससे अंधेरे में कुछ वैकल्पिक उपाय किया जा सके।

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