पहली पत्नी से तलाक लिए बिना दूसरी महिला के साथ रहना पड़ा भारी, आरक्षक सेवा से पृथक

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(जिला ब्यूरो मनोज कुमार यादव)

 

विभागीय जांच में दोनों आरोप प्रमाणित, 299 दिन निलंबन के बाद एसपी ने जारी किया दंडादेश

 

डिंडौरी। पहली पत्नी से विधिवत तलाक लिए बिना दूसरी महिला के साथ पति-पत्नी की तरह रहने और उससे दो बच्चों के जन्म के मामले में डिंडौरी पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। आवेदक दीपक ठाकुर की शिकायत पर हुई विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने के बाद पुलिस अधीक्षक डिंडौरी ने आरक्षक क्रमांक 244 रोहन सिंह मरावी को सेवा से पृथक करने का अंतिम आदेश जारी किया है।

 

विभागीय आदेश के अनुसार आरक्षक रोहन सिंह मरावी पूर्व में चौकी गोपालपुर में पदस्थ थे और वर्तमान में रक्षित केंद्र डिंडौरी से संबद्ध थे। उनके विरुद्ध विभागीय जांच क्रमांक 02/2025 संचालित की गई थी।

 

शिकायत के बाद शुरू हुई विभागीय जांच

 

आवेदक दीपक ठाकुर ने आरक्षक के विरुद्ध शिकायत प्रस्तुत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि रोहन सिंह मरावी ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 22(1)(2) का उल्लंघन करते हुए पहली पत्नी सावित्री बाई से कानूनी रूप से तलाक लिए बिना दूसरी महिला पार्वती बाई के साथ पति-पत्नी की तरह जीवन व्यतीत किया।

 

दस्तावेजों में दो बच्चों का सामने आया उल्लेख

 

विभागीय जांच के दौरान समग्र आईडी, परिवार आईडी, बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र, शैक्षणिक दस्तावेज सहित अन्य अभिलेखों की जांच की गई। जांच में पार्वती बाई से आरक्षक के एक पुत्र और एक पुत्री होने के संबंध में दस्तावेजी साक्ष्य सामने आए।

 

जांच अधिकारी ने दस्तावेजों और गवाहों के कथनों के आधार पर दोनों आरोपों को प्रमाणित माना। जांच के दौरान पहली पत्नी सावित्री बाई से विधिवत तलाक लिए जाने संबंधी कोई वैधानिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया।

 

अलग रहने का दिया था तर्क

 

अपने जवाब में आरक्षक रोहन सिंह मरावी ने बताया कि उनका पहली पत्नी सावित्री बाई से लंबे समय से विवाद चल रहा था और दोनों अलग-अलग रह रहे थे। उन्होंने यह भी बताया कि भरण-पोषण को लेकर न्यायालय के आदेश के अनुसार राशि का भुगतान किया जा रहा है।

 

हालांकि विभागीय जांच में अलग रहना या पारिवारिक विवाद वैधानिक तलाक का प्रमाण नहीं माना गया। तलाक से संबंधित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण आरोप प्रमाणित पाए गए।

 

पुलिस विभाग की छवि धूमिल करने का भी आरोप

 

आरक्षक पर विभागीय जांच में दूसरा आरोप यह था कि उनके आचरण से आम जनता के बीच पुलिस विभाग की छवि प्रभावित हुई। जांच अधिकारी ने इस आरोप को भी प्रमाणित माना। आदेश में विवाहित रहते हुए बिना वैधानिक तलाक दूसरी महिला के साथ पति-पत्नी की तरह रहने के आचरण को सेवा नियमों के विपरीत माना गया।

 

299 दिन निलंबित रहे आरक्षक

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए आरक्षक रोहन सिंह मरावी को निलंबित किया गया था। आदेश के अनुसार वे 27 मार्च 2025 से 10 जनवरी 2026 तक कुल 299 दिन निलंबित रहे।

 

विभागीय जांच में दोनों आरोप प्रमाणित होने के बाद पुलिस अधीक्षक डिंडौरी ने आरक्षक को “सेवा से पृथक” करने का दंडादेश जारी किया है। आदेश में निलंबन अवधि को भी नियमानुसार “निलंबन में गुजारना” निराकृत किया गया है।

 

दीपक ठाकुर की शिकायत से शुरू हुई विभागीय कार्रवाई जांच के बाद आरक्षक रोहन सिंह मरावी को सेवा से पृथक किए जाने के आदेश के साथ पूरी हुई।

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